मुफ्त का वेतन
लेकर मौज करो ये है सरकारी स्कूलों की हाल शिक्षको की पोल खोल रहा, बच्चों के भविष्य से शिक्षक खिलवाड़ करने का उठाया है जिम्मा, इन शिक्षकों की यदि शिकायत भी हो जाए तो नेताओ से लेकर अधिकारीयो की इन लोगो को बचाने के लिए फोन की घण्टी भी सुनाई देने लग जाता कौन है इन सबका जिम्मेदार।

बिलासपुर मस्तूरी

Hindtimes हरिओम श्रीवास, विमल कांत( मस्तूरी बिलासपुर )

बिलासपुर मस्तूरी सरकारी स्कूलों की बदहाली से हम अनजान नहीं हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति से तो सब वाकिफ हैं, लेकिन उसके कारणों का बहुत कम लोगों को पता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि स्कूलों की इस बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन लोग हैं। दरअसल जिनकी पीठ पर इन स्कूलों और यहां पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी दी गई है, वही इनके विध्वंसक बन बैठे हैं। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकास खण्ड के जुनवानी ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम कटहा में 138 बच्चों की दर्ज संख्या जिसमे पांच शिक्षक  है और जुनवानी के प्राथमिक शाला में  का एक स्कूल का वीडियो है जो सरकारी स्कूलों की सारी पोल-पट्टी खोल रहा है। कहते हैं की गुरु से बढ़ कर ज्ञान देने वाले कोई नही है जब इन लोगो के पास ज्ञान नहीं है बच्चों को कैसे शिक्षा देंगे जो खुद स्कूल सही तरीके से नही आते 

कटहा स्कूल में पदस्थ सफाई कर्मी बता रहे है कि स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक रमेश पटेल उपस्थित थे देरी से एक शिक्षिका आई थी और कुछ देर बाद उपस्थिति पंजी में दस्खत कर वापस चली गई क्योंकि उनका घर भी पांच किलोमीटर की दूरी पर जब आओ और जाओ इन शिक्षकों की पहुच इतनी है कुछ शिकायत हो जाये तो इनको ब नेता से लेकर अधिकारी तक का फोन की घण्टी बजने लगे जाती इसलिए इन शिक्षकों के खिलाप शिकायत करने से भी लोग डरते हैं पूरी वकया वहां के भृत्य की जुबांनी और पांचवी कक्षा की बच्चों से पढ़ाई का स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सरकारी शिक्षक  की उपस्थिति के बारे में पूछने पर बहुत सोच समझ कर बताया गया कि वो कब आते हैं, केवल ये तो सिर्फ बुधवार का है और भी कई दिनों से नहीं आए थे।आने के बाद अनुपस्थिति के स्थिति में उपस्थिति दर्ज हो जाता है

आसपास के लोगों ने बताया कि इस स्कूल में पंजीकृत  बच्चों को पढ़ाने के लिए पांच शिक्षक है , जिनमें से एक शिक्षक पटेल ही आता हैं । इन दिनों इस विद्यालय की व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई। ग्रामीणों ने बताया कि  सप्ताह में एक दो  दिन आकर हस्ताक्षर करके चले जाते हैं।पढ़ने वाले विद्यार्थियों की हालात इतनी दयनीय स्थिति है कि अपने स्कूल का नाम भी नही पता कि किस स्कूल में पढ़ते हैं वहां के शिक्षक कितने है पहाड़ा हो या हिंदी का वर्णमाला, व्यंजन, बारहखड़ी सप्ताह का नाम इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि शिक्षक  पढ़ाते हैं। 


सरकार की तरफ से मिलने वाली मोटी तन्ख्वाह के बावजूद सरकारी शिक्षक मुफ़्तख़ोरी का खाना पसंद करते हैं । सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षकों का यह रवैया बेहद घातक हो सकता है। 

मस्तूरी बीईओ अश्वनी भारद्वाज का कहना है कि जुनवानी की शिकायत लंबे समय से आ रहा था जुलाई माह में  भी वेतन रोका गया फिर भी कोई सुधार नहीं हो रहा और  शिकायत आया जांच की जाएगी कड़ी कार्यवाही किया जाएगा