इक्कीसवीं सदी भारत की होगी

सूरदास जी की भविष्यवाणी —

हमारे एक पूज्य संत “कारव वाले बाबा ” जो ब्रह्मलीन हो चुके हैं, ने अपने शिष्यों को एक पद सुनाया था | एक सुधी शिष्य से यह मेरे संग्यान में आया | यह भारत की एक घटना की भविष्यवाणी है | विशेषता यह है कि ये भविष्य कथन जन्मांध सूरदास जी का है और लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व का है | पद निम्नवत है —
संवत दोय हजार के ऊपर ऐसो योग परै |
आश्विन कृष्ण सप्तमी दिन सोमवार परै ||
मेघनाथ रावण को बेटा शुभ अवतार धरै |
पश्चिम से उत्तर दिशि धावै चंहु दिशि चक्र चलै ||
तेज तुर्क को ऐसे जारै जैसे कीट पतंग जरै |
मानुष धर्म मर्म नंहि जानै आपुहि आप मरै ||
अस्सी साल को सतजुग आवै धर्म की बेल चढ़ै |
‘सूरदास’ यह हरि की लीला टारे नांहि टरै ||
आदरणीय स्वामी जी कहते थे ऐसा योग संवत 2071 तदनुसार 15,सितंबर’ 2014 को पड़ चुका है | मैंने पचांग से इसकी पुष्टि की और सत्य पाया |
मैंने अपनी अल्प बुद्धि से इसकी विवेचना आज के परिप्रेक्ष्य में की | रावण पुत्र मेघनाथ अवतार लेने के बाद पश्चिम से उत्तर की ओर जायेगा और चारो ओर संहारक घटना चक्र चलेगा | हिंदू और मुस्लिम ऐसे जलेंगे जैसे आग में कीट पतंग स्वभावतः प्राण त्याग करते हैं | मनुष्य धर्म का मर्म नहीं जानेगा और स्वयं मृत्यु का वरण करेगा |इसके बाद अस्सी वर्ष का सतयुग आयेगा, धर्म की स्थापना होगी | मैं सूरदास यह कहता हूँ कि ये प्रभु की लीला है | ऐसा होकर ही रहेगा |इसे टाला नहीं जा सकता |
इसमें एक पंक्ति है “पश्चिम से उत्तर दिशि धावै ” मैंने इसका निहितार्थ वर्तमान परिस्थिति और सन-2014 को देखकर इसे मोदी पर घटित माना है जो इसी समय भारत के पश्चिम गुजरात से भारत के उत्तर दिल्ली में प्रतिष्ठित हुये हैं | मैं स्वयं तीसरे महाभारत नजदीक होने की बात कहता रहा हूँ |
इसी संदर्भ में महर्षि अरविंद का एक भविष्य कथन मननीय है जिसे स्वामी विवेकानंद ने 1894-95 में कई शिष्यों को पत्र में लिखा है | महर्षि अरविंद कहते हैं कि रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म युग परिवर्तन की वेला में 1836 को हुआ है | युगांतर 175 वर्ष का होता है | इसके पूरा होने पर भारतवर्ष का भाग्योदय होगा और भारत विश्व का सिरमौर बनेगा | ये वर्ष –
1836 + 175 = 2011 होता है और घटनाचक्र महर्षि अरविंद की पुष्टि कर रहा है | उन्नीसवीं सदी यूरोप की, बीसवीं सदी अमेरिका की थी लेकिन इक्कीसवीं सदी भारत की होगी |
शुभकामनाएं |

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