बिलासपुर मस्तूरी

सेलिंन केरकेट्टा सचिव की मनमानी से परेशान ग्रामीण और पंचों ने की शिकायत, हटाने की मांग की ग्रामीणों ने लगाया सचिव पर दुर्व्यवहार का भी आरोप काम लेकर जाने से भगा दिया जाता है सचिव को नही हटाने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

Summary

Hind Times:- बिलासपुर जिले मस्तूरी ब्लॉक का ग्राम पंचायत लिमतरा में सचिव के मनमानी से सरपंच एवं ग्रामीण परेशान इनके अड़ियल रैवये एवं काम करने के तरीके से  सोमवार को ग्रामीण शिकायत करने जनपद कार्यालय पहुंचे। सचिव  से परेशान ग्रामीणों […]

Hind Times:- बिलासपुर जिले मस्तूरी ब्लॉक का ग्राम पंचायत लिमतरा में सचिव के मनमानी से सरपंच एवं ग्रामीण परेशान इनके अड़ियल रैवये एवं काम करने के तरीके से  सोमवार को ग्रामीण शिकायत करने जनपद कार्यालय पहुंचे। सचिव  से परेशान ग्रामीणों ने बताया कि सचिव के बहुत कम समय के लिए कभी-कभी ग्राम पंचायत में आते हैं। कोई काम लेकर जाने पर वह आनाकानी करने के साथ ही हितग्राहियों को बार-बार एक ही काम के लिए चक्कर कटवाते हैं।


ग्राम पंचायत लिमतरा के निवासी सहित कई बुजुर्ग पेंशन के हितग्राही तीन साल से वृद्धा पेंशन में नाम जुड़वाने के लिए भटक रहे हैं। यह मामला जनपद पंचायद मस्तूरी का है। यहां पंचों से लेकर बुजुर्ग तक सचिव के कार्यप्रणाली से परेशान हैं। आधा दर्जन से अधिक पंच सोमवार को जनपद कार्यालय पहुंचे और सचिव के खिलाफ शिकायत करते हुए बताया कि पंचायत सचिव बीते कई महीनों से पंचों को दी जाने वाली मानदेय राशि नहीं दी है। पंचों ने जनपद सीईओ को दिया आवेदन देकर हटाने की मांग की है

पंचों ने बताया कि ग्राम पंचायत  में 20 पंच हैं, इनमें सचिव ने कुछ पंचों को हर माह मानदेय की राशि का भुगतान कर देते हैं, लेकिन जब अन्य पंच मानदेय के राशि के बारे में सचिव सेलिंन केर्केटा को  करते हैं तो वे पंचायत से बाहर निकलने के लिए कहते हैं। शिकायती आवेदन प्रस्तुत करने पंचायत सरपंच उप सरपंच पंच  ग्रामीण शिकायत करने पहुंचे थे।

 सचिव के कार्यप्रणाली से परेशान ग्रामीणों ने सीईओ को सौंपे शिकायती आवेदन में मांग किया है कि प्रशासन के द्वारा पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से नहीं हटाया गया तो आंदोलन करेंगे। पंचायत सचिव के तानाशाह रवैये के कारण पंचायत में होने वाले विकास कार्य भी रुके हुए हैं। इसके कारण ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणोंं ने बताया सचिव ग्राम पंचायत में भी नियमित नहीं पहुंचते हैं। इससे छोटे-छोटे काम के लिए हमें परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा गई बैठकें और ग्राम सभा का भी आयोजन नहीं हो पाता है। साथ ही यदि कोई ग्रामीण ग्राम पंचायत सचिव के घर काम को लेकर जाने पर उसे घर से भगा दिया जाता हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सचिव के एक हस्ताक्षर के लिए महीनों का चक्कर काटना पड़ता है।