कोरबा बिलासपुर

कन्नौजिया श्रीवास समाज साहित्यक मंच छ.ग. के तत्वाधान में द्वितीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन सम्पन्न, रवि शंकर श्रीवास के द्वारा “गुम हो गया हुँ खुद की तलाश है” कविता कहीं ।

Summary

Hindtimes :- हरिओम श्रीवास कन्नौजिया श्रीवास समाज साहित्यक मंच छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में द्वितीय काव्य सम्मेलन का आंँनलाईन के माध्यम से कार्यक्रम के अध्यक्ष रामसाय श्रीवास मुख्य अतिथि सत्यवान श्रीवास (कन्नौजिया श्रीवास समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष), विशिष्ट अतिथि राधा रमण […]


Hindtimes :- हरिओम श्रीवास

कन्नौजिया श्रीवास समाज साहित्यक मंच छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में द्वितीय काव्य सम्मेलन का आंँनलाईन के माध्यम से कार्यक्रम के अध्यक्ष रामसाय श्रीवास मुख्य अतिथि सत्यवान श्रीवास (कन्नौजिया श्रीवास समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष), विशिष्ट अतिथि राधा रमण श्रीवास, राम रतन श्रीवास, संयोजक एवं संचालक रमाकांत श्रीवास रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में मांँ सरस्वती की वंँदना उषा श्रीवास की मधुर वाणी से हुई , तत्पश्चात अध्यक्ष रामसाय श्रीवास ने अपने उद्बोधन में समस्त कवियों एवं कवियत्री का स्वागत करते हुए कहा ये समाज के लिए खुशी की बात है की नवोदित रचनाकारों की रचना प्रशंसनीय है और यह सफल होते हुए दिखाई दे रहा है । सभी को हार्दिक बधाई दिए।

मुख्य अतिथि सत्यवान श्रीवास ने कहा आज तक हमारे समाज के साहित्यकारों को साहित्यिक मंच नहीं मिला था जिससे लोगों में साहित्य के प्रति रुझान नहीं था लेकिन अब एक साहित्यिक मंच मिल गया है इसे सदैव आगे बढ़ाते रहें। विशिष्ट अतिथि राधा रमण श्रीवास ने इस कार्यक्रम की प्रशंसा की और कहा इस कोरोना काल में साहित्य जो सुषुप्त अवस्था में था आज नव पल्लवित हो खिल उठा है , समाज को एक नई दिशा प्रदान कर रहा है । समाज साहित्य का दर्पण है । कोरोना वायरस से सभी को बचने के लिए अपने सुझाव दिए और देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं दी, साथ ही– “ओ जवान देश के वसुंधरा पुकारती” की कविता सुनाई । मालिक राम श्रीवास (पूर्व महासचिव ) ने इसे समाज का विकास बताया और प्रसन्नता जाहिर की । शिवरतन श्रीवास (कोल फील्ड्स) ने समाज को नई उर्जा के साथ नई मुकाम प्राप्त होने पर गर्व महसूस किया एवं आभार व्यक्त किया। खगेश श्रीवास ने “जीवन के जूझते पन्ने पर असली कोई कहानी” कविता का पाठ किया । रवि शंकर श्रीवास के द्वारा “गुम हो गया हुँ खुद की तलाश है” कविता कहीं ।

इस कार्यक्रम के महासचिव राम रतन श्रीवास ने बड़े भाई के संबंध में “भाई हो तो भरत जैसे” कविता का पाठ कर सभी को भाव विभोर कर दिया । नोबेल श्रीवास ने अपनी कविता में कहा “कैसा कहर तुमने ढहाया है, चारों तरफ मौत का साया है” । घनश्याम श्रीवास ने मानव जीवन पर –“मैं मानाव हूंँ दिखावा और प्रदर्शन केवल स्व स्वार्थ” का पाठ किया । बसंत श्रीवास ने “बचपन का एक जमाना था पाठकर सभी को बचपन की याद ताजा करा दी। उषा श्रीवास (महिला बाल विकास परियोजना ) ने “धीरे-धीरे यहांँ का मौसम बदलने लगा है , वातावरण सो रहा था” पाठ कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। चंँद्रकांँत श्रीवास जी ने व्यंग के रूप में कहा “हे साहस के महासागर मुख में भरते विष का गागर”” कविता पाठ कर सभी को समां बांधा और तालियांँ गूंँज उठी। संतोष श्रीवास जी ने “नमन तुम्हे वंदन है, प्रियवर वह धुली पग जो चंदन है” का बेहतरीन पाठ किया । इस कार्यक्रम के अध्यक्ष महोदय श्री रामसाय श्रीवास ने अपनी काब्यांँजली में “बड़ी मोदक से चाहा था ,कोई हमराज मिल जाए” की प्रस्तुति दी । संचालन कर रहे हैं इंजीनियर रमाकांत श्रीवास ने “हाथ की रेत सा, ओ फिसलता गया”‘ गीत का बेहतरीन पाठ किया एवं सभी को अपनी प्रस्तुति के दौरान एक सूत्रीय मंच पर बांधे रखा कार्यक्रम की समाप्ति पर उन्होंने सभी कवियों व कवियत्री को हृदयतल से आभार प्रकट करते हुए समाप्ति की घोषणा की । खुशनुमा माहौल में कार्यक्रम की समाप्ति हुई । इस कार्यक्रम का उद्देश्य सकरात्मक विचारों को समाज में स्थापित कर साहित्यिक गतिविधियों के साथ समाज के सभी प्रतिभागियों को आगे लाना है।