जांजगीर चाम्पा

जिले भर के पंचायत सचिवों ने अपने -अपने मुख्यालय में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर अपनी मांगों को लेकर तीसरे दिन भी जारी धरना

Summary

Hindtimes जांजगीर (चाम्पा) सरकार से कोई आश्वासन मिलता ना देख कर पंचायत सचिवों ने अपना हड़ताल जारी रखा है । मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश पंचायत सचिव संघ के द्वारा 26 दिसंबर से कलम -बंद काम -,बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ […]

Hindtimes जांजगीर (चाम्पा) सरकार से कोई आश्वासन मिलता ना देख कर पंचायत सचिवों ने अपना हड़ताल जारी रखा है । मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश पंचायत सचिव संघ के द्वारा 26 दिसंबर से कलम -बंद काम -,बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ किया गया । सचिव संघ की यह मांग है कि पंचायत सचिवो को भी शासकीय  किया जाए । सचिव संघ के द्वारा मुख्यमंत्री तथा सचिव को नियमिततीकरण करने ज्ञापन दिया है ।

ज्ञापन मे सचिव संघ ने बताया है कि सचिवों के द्वारा 29 विभागों के 280 प्रकार के काम किए जाते हैं जो राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा कर लोकतंत्र को मजबूत बनाने का कार्य हम  सचिवो के द्वारा होता है । उन्होंने ज्ञापन में बताया है कि सचिवों के नियमितीकरण की मांग को प्रदेश के 90 विधायकों में से 65 विधायकों ने सही कहा है और उनकी अनुशंसा की है , साथ ही उनका शासकीयकरण करने की मांग को जायज ठहराया है । विदित हो कि सचिव संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल 21 दिसंबर से शुरू हुई हैं  सभी जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन एवं रैली निकाली गई और कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया साथ ही जिला पंचायत सीईओ को मुख्य सचिव के नाम से ज्ञापन दिया गया । 24 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के प्रत्येक विकासखंड में धरना प्रदर्शन किया गया और रैली निकालकर एसडीएम ,तहसीलदार तथा जनपद सीईओ को नियमित करने की मांग के साथ ज्ञापन सौंपा गया । इसके बाद भी विभाग से कोई आश्वासन जब उन्हें नहीं मिला तो उन्होंने 26 दिसम्बर 2020 को काम बंद कलम बंद अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ किया गया जो अब तक जारी है ।

सचिव संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह गहलोत ने कहा है कि एक और सचिव है जो शासन की सभी योजनाओं को जनता के पास पहुंचाने का कार्य कर रहे कर रहे हैं  शासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचा कर सरकार के लोकतंत्र की अवधारणा को मजबूत करने का काम सचिव कर रहे हैं परंतु आज इतने वर्षों के बाद भी हमारा नियमित नहीं किया जाना हमारे साथ मजाक है और हमारी मेहनत का माखौल उड़ाना है । इस विषय पर उनका कहना है कि हमारे साथ ही नियुक्ति पाए शिक्षाकर्मियों का संविलियन हो चुका है परंतु हम लोगों को आज तक ना तो पेंशन की पात्रता है और ना ही अन्य कोई शासकीय सुविधाओं का लाभ मिल रहा है । इसलिए हमारी मांग है कि हमे भी नियमित करके  शासकीय सेवाओं का लाभ दिया जाए ।